इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सैनी की सजा निलंबित की



इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के एक मामले में भारतीय जनता पार्टी भाजपा के अयोग्य ठहराए गए विधायक विक्रम सैनी को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो साल की जेल की सजा को निलंबित कर दिया है. साथ ही आज (21 नवंबर) के लिए उनकी सजा के निलंबन की सुनवाई को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया.

हाईकोर्ट ने इसी मामले में सैनी को भी जमानत दे दी. विक्रम सैनी द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समित गोपाल ने कहा, ‘जमानत/सजा के लिए प्रार्थना स्वीकार की जाती है.’

मुजफ्फरनगर की एमपी/एमएलए अदालत के विशेष न्यायाधीश ने 2013 मुजफ्फरनगर दंगा से जुड़े एक मामले में 10 अक्टूबर, 2022 को खतौली से विधायक विक्रम सैनी और 11 अन्य लोगों को दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी. हालांकि सजा सुनाए जाने के कुछ देर बाद ही जमानत भी दे दी थी.

इसके एक महीने बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा ने सैनी को विधायक के तौर पर अयोग्य ठहरा दिया था और उनकी सीट (खतौली) रिक्त घोषित कर दी थी, जिसके लिए पांच दिसंबर को उपचुनाव होने जा रहा है.

सैनी ने अपनी दोषसिद्धि और सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

सैनी के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है और न ही जनता की ओर से कोई गवाह है. इसके अलावा यहां किसी के घायल होने की भी बात नहीं है.

मौजूदा मामले में हाईकोर्ट ने संबद्ध अदालत की संतुष्टि के अनुरूप एक निजी बांड और दो जमानतदार के साथ सैनी को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राज्य की ओर से पेश सरकारी अधिवक्ता अंकित श्रीवास्तव ने सजा/जमानत स्थगित करने की प्रार्थना का विरोध किया.

हाईकोर्ट के आदेश पर अधिवक्ता श्रीवास्तव ने कहा, ‘इसमें दो चीजें हैं – सजा का निलंबन और दोषसिद्धि का निलंबन. सजा के निलंबन की अनुमति दी गई है, जबकि दोषसिद्धि के निलंबन के उनके आवेदन पर सोमवार को सुनवाई होगी.’

बता दें कि अयोग्य ठहराए गए भाजपा विधायक विक्रम सैनी तथा 26 अन्य के खिलाफ मुजफ्फरनगर दंगों की मुख्य वजह माने जाने वाले कवाल कांड मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था.

अगस्त 2013 में सैनी कवाल गांव के प्रधान थे, जहां मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित हिंसा की पहली घटना दर्ज की गई थी. मामला 28 अगस्त 2013 का है, जब मुजफ्फरनगर के कवाल कस्बे में शाहनवाज, सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी.

पुलिस ने कहा था कि शाहनवाज की हत्या के मुख्य आरोपी सचिन और गौरव की ग्रामीणों ने हत्या कर दी थी. इन हत्याओं ने मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में सांप्रदायिक दंगे भड़का दिए थे.

कवाल कांड के बाद सितंबर 2013 में मुजफ्फनगर और आसपास के कुछ जिलों में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिनमें कम से कम 62 लोग मारे गए थे तथा 40 हजार से अधिक लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था.

बता दें कि अक्टूबर 2021 में दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर प्रदेश के 2013 मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों के दौरान हिंसा में आरोपी भाजपा के अयोग्य ठहराए गए विधायक विक्रम सैनी और 11 अन्य को बरी कर दिया था. इस मामले में अभियोजन पक्ष के पांच गवाहों के मुकर जाने के बाद अन्य को संदेह का लाभ देकर छोड़ दिया गया था.

सैनी अपने भड़काऊ बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. अगस्त 2019 में धारा 370 को हटाए जाने के बाद उन्होंने कहा था कि भाजपा कार्यकर्ता ‘उत्साहित’ हैं, क्योंकि वे अब ‘कश्मीर की गोरी लड़कियों’ से शादी कर सकते हैं.

जनवरी 2019 में सैनी ने कहा था कि जो लोग भारत में सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं, उन्हें ‘बम से उड़ा देना चाहिए’. जनवरी 2018 में उन्होंने दावा किया था कि चूंकि भारत को ‘हिंदुस्तान’ कहा जाता है, इसलिए यह देश हिंदुओं का है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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