कभी-कभी रोने के भी होते हैं फायदे, जानें क्यों अच्छा होता है आंसुओं का निकल जाना


रोना मनुष्यों की एक सामान्य क्रिया है, जो कई अलग-अलग भावनाओं की वजह से ट्रिगर हो जाती है। लेकिन आपने क्या कभी सोचा है कि मनुष्य रोते क्यों हैं? रोने से हमारे शरीर और दिमाग दोनों को फायदा पहुंचता है। यह फायदे तभी से शुरू हो जाते हैं जब बच्चा पैदा होते ही पहली बार रोता है। अगर आप रोने से जुड़े फायदों के बारे में नहीं जानते हैं, तो आइए आपको बताएं कई दिलचस्प लाभो के बारें में:

शरीर होता है डिटॉक्स

आंसू 3 तरह के होते हैं:

रिफ्लेक्स आंसू
लगातार आने वाले आंसू
भावनात्मक आंसू

रिफ्लेक्स आंसू वे होते हैं, जो आखों में जमी धूल-कचरे, धुएं को साफ कर देते हैं। लगातार बहने वाले आंसू आपको आंखों को नमी पहुंचाते हैं और इंफेक्शन से बचाते हैं। भावनात्मक आंसू के भी कई फायदे हैं। लगातार बहने वाले आंसुओं में 98 प्रतिशत पानी होता है, वहीं भावनात्मक आंसुओं में तनाव के हॉर्मोन्स और दूसरे टॉक्सिन्स होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि आंसू इन चीज़ों को आपके शरीर से बाहर निकाल देते हैं।

खुद को शांत करने में मिलती है मदद

खुद को शांत करने के लिए शायद रो लेना सबसे अच्छा तरीका है। रिसर्च में पाया गया है कि रो लेने से पैरा-सिम्पथेटिक नर्वस सिस्टम (PNS) एक्टीवेट हो जाता है। PNS आपके शरीर को आराम और पाचन में मदद करता है। कुछ देर रो लेने के बाद आप खुद शांत महसूस करना शुरू कर देते हैं।

आपको सपोर्ट मिलता है

अगर आप निराश महसूस कर रहे हैं, तो रोने से आपे आसपास मौजूद लोगों को पता चलेगा कि आपको सपोर्ट की ज़रूरत है। छोटा बच्चा भी ध्यान खींचने के लिए रोता है। ऐसा करने से भी कई लोग बेहतर महसूस करते हैं।

आपको दुःख से उबरने में मदद मिलती है

शोक करना एक प्रक्रिया है। इसमें दुःख, सुन्नता और क्रोध भी शामिल होता है। शोक मनाते समय रोना एक खासतौर पर ज़रूरी होता है। इससे आपको इस दुख से उबरने में मदद मिलती है।

दर्द को कम करता है

लंबे समय तक रोने से ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन रिलीज़ होते हैं। ये फील-गुड केमिकल्स शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह के दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं। एक बार एंडोर्फिन रिलीज़ हो जाए, फिर आपका शरीर कुछ हद तक सुन्न महसूस कर सकता है। वहीं, ऑक्सीटोसिन आपको शांत महसूस कराते हैं।

मूड में सुधार होता है

दर्द को कम करने में आपकी मदद करने के साथ-साथ रोने से आपका मूड भी बेहतर होता है। जब आप रोते हैं तो आप जल्दी-जल्दी काफी हवा मुंह के ज़रिए अंदर ले लेते हैं, जिसकी वजह से दिमाग का तापमान कम होने लगता है। जब आपके दिमाग का तापमान ठंडा रहता है, तो शरीर भी बेहतर महसूस करता है। इससे मूड बेहतर होता है।

भावनाओं को संतुलित करता है

रोना सिर्फ किसी दुख की बात के जवाब में नहीं होता है। कई बार आप तब भी रो पड़ते हैं जब अत्यन्त खुशी, डर या तनाव में हों। येल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि इस तरह रोने से भावनात्मक संतुलन बहाल करने में मदद मिल सकती है।

मेडिकल हेल्प कब लेनी चाहिए?

किसी ऐसी चीज़ जिससे आपको खुशी मिलती है या दुख होता है, जिसके जवाब में आप रो पड़ते हैं, एक आम बात है। रोने से आप बेहतर महसूस करते हैं, इसलिए ऐसा करते वक्त शर्माएं नहीं।

हालांकि, ज़रूरत से ज़्यादा रोना भी ठीक नहीं है और इसके लिए अपने डॉक्टर से बात करें। अगर रोना आपके रोज़मर्रा के कामों के बीच में आ रहा है, तो यह तनाव का संकेत हो सकता है।

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