चेचक से सात संदिग्ध मौतें, सितंबर से अब तक मुंबई में 164 मामले सामने आए: नगर निकाय



मुंबई: महाराष्ट्र में इस साल अब तक खसरे के 503 मामले दर्ज किए गए हैं और इस संक्रामक बीमारी के आठ संदिग्ध मरीजों की मौत हुई हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से बृहस्पतिवार (17 नवंबर) को यह जानकारी दी.

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने एक अलग बुलेटिन में कहा कि मुंबई महानगर में बीमारी के कारण आठ संदिग्ध मौतें हुई हैं और अब तक 169 मामलों की पुष्टि हुई है.

बुलेटिन के अनुसार, शहर में खसरे के 25 नए मरीज भर्ती किए गए, जिससे अस्पताल में भर्ती व्यक्तियों की संख्या 105 हो गई. दो मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं, जबकि 38 अन्य को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक बुलेटिन में कहा गया है कि महाराष्ट्र में 26 स्थानों से खसरा फैलने की सूचना मिली है. इसमें मुंबई में 14, भिवंडी (ठाणे जिले) में सात और मालेगांव शहर (नासिक जिले) में पांच स्थान शामिल हैं.

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संक्रमण के प्रसार से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को अस्पताल में भर्ती मरीजों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं.

उन्होंने अधिकारियों को उन लोगों का टीकाकरण करने के लिए खसरा निगरानी प्रयासों को बढ़ाने का निर्देश दिया, जो छूट गए हैं और समुदायों में टीकाकरण के बारे में मिथकों और गलतफहमियों को दूर करने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया.

स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में कहा गया है, ‘मुंबई में आठ नगरपालिका वार्ड खसरे से प्रभावित हुए हैं और सबसे अधिक प्रकोप (5 मामले) ‘एम-ईस्ट’ वार्ड में देखे गए हैं. इसके बाद ‘एल’ वार्ड में तीन मामले (सभी पूर्वोत्तर मुंबई में) देखे गए हैं. खसरे के आठ संदिग्ध मरीजों की मौत हो गई है. इनमें से सात ‘एम-ईस्ट’ वॉर्ड के एक और ‘एल’ वार्ड के हैं. इनमें से केवल एक बच्चे ने खसरे के टीके की एक खुराक ली थी, जबकि बाकी को टीका नहीं लगाया गया था.’

‘एम-ईस्ट’ वार्ड में गोवंडी और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं.

राज्य के स्वास्थ्य निगरानी अधिकारी प्रदीप आवटे ने कहा कि अगर एक हफ्ते में किसी संक्रमण के पांच संदिग्ध मामले सामने आते हैं, जिनमें से दो से अधिक की पुष्टि प्रयोगशाला परीक्षण में होती है, तो इसे प्रकोप कहा जाता है.

स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि खसरा- डायरिया, निमोनिया और प्रतिरोधक क्षमता कम होने के प्रमुख कारणों में से एक है और इससे बच्चे विभिन्न बीमारियों और कुपोषण के दुष्चक्र में फंस जाते हैं.

बुलेटिन में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग खसरे की जांच के लिए घर-घर निगरानी कर रहा है और अभियान के तहत विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं.

जिन बच्चों को खसरे का टीका नहीं लगा है, उनके लिए नौ माह से पांच वर्ष की आयु के बच्चों की जिला/नगर निगमवार सूची तैयार की गई है. इन बच्चों को विशेष और साथ ही नियमित सत्रों में प्रतिरक्षित (टीका लगाना) किया जाता है.

विभाग ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं और राज्य में अक्टूबर/नवंबर में 2974 टीकाकरण सत्र आयोजित किए गए हैं. खसरे के प्रत्येक मरीज को विटामिन ए की दो खुराक दी जानी है.

बुलेटिन में कहा गया है कि 2021 में महाराष्ट्र में खसरे के संक्रमण के 92 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2020 में यह आंकड़ा 193 था.

बुलेटिन में कहा गया है कि वर्तमान में कांदिवली स्थित भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अस्पताल, घाटकोपर में राजावाड़ी अस्पताल और गोवंडी में शताब्दी अस्पताल (सभी मध्यम मामलों के लिए) में खसरे के रोगियों के इलाज की सुविधा उपलब्ध है. कस्तूरबा अस्पताल में गंभीर और अति गंभीर मामलों से निपटने के लिए 83 बेड और 5 वेंटिलेटर के साथ एक अलग आइसोलेशन वार्ड है.

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