दिल्ली पत्रकार संघ ने पीएमओ द्वारा क्लब और संस्थानों से विवरण मांगने संबंधी आदेश की निंदा की


प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक आदेश जारी करके गृह सचिव और कैबिनेट सचिव सहित सरकार के शीर्ष अधिकारियों को दिल्ली के सभी संस्थानों, क्लबों और ऐसी सभी जगहों की तत्काल समीक्षा करने के लिए कहा है, इनमें प्रेस निकाय और कॉन्फ्रेंस सेंटर भी शामिल हैं.

दिल्ली जिमखाना क्लब. (प्रतीकात्मक फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: दिल्ली पत्रकार संघ (डीयूजे) ने उन खबरों पर ‘गंभीर चिंता’ व्यक्त की है, जिनमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और चुनिंदा मंत्रालय दिल्ली में सभी संस्थानों और क्लबों का विवरण एकत्र करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनमें प्रेस निकाय एवं सम्मेलन केंद्र (कॉन्फ्रेंस सेंटर) भी शामिल हैं और ऐसा इनके आंतरिक मामलों की निगरानी करने के लिए किया जा रहा है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, पीएमओ ने गृह सचिव और कैबिनेट सचिव सहित सरकार के शीर्ष अधिकारियों को ऐसी सभी जगहों की तत्काल समीक्षा करने के लिए एक संदेश भेजा था. इसने पिछले एक साल में ऐसे केंद्रों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी भी मांगी थी, जो सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं या सरकारी जमीन पर बने हैं.

इस तरह के विवरण प्रस्तुत करने के लिए अधिकारियों को दो दिन का समय दिया गया था और यह समय सीमा बीते मंगलवार (16 नवंबर) की शाम समाप्त हो गई.

एक ईमेल में पीएमओ की उप-सचिव आम्रपाली काटा ने कहा था, ‘यह अनुरोध किया जाता है कि मांगी गई संलग्न जानकारी साझा की जाए. मंत्रालय/संस्थानों/मंत्रालय के स्वायत्त निकायों से संबंधित विवरण 16 नवंबर शाम 5 बजे तक साझा किए जा सकते हैं.’

पीएमओ के संचार का जवाब देते हुए दिल्ली पत्रकार संघ ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि प्रेस की स्वतंत्रता एवं पत्रकारों की समस्याओं से निपटते वाले और सेमिनार व चर्चाएं आयोजित करने वाले निकायों में दखल न दिया जाए.

प्रेस निकाय ने क्लब और पत्रकारों के अन्य निर्वाचित निकायों को ‘चुनकर निशाना बनाने’ पर भी चिंता व्यक्त की.

पत्रकार संघ के प्रेस में जारी बयान में कहा गया है कि यह ‘गंभीर चिंता’ का विषय है कि अन्य निकायों के अलावा पीएमओ के शीर्ष कार्यालय ने भी क्लबों व कॉन्फ्रेंस हॉल की तत्काल समीक्षा के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है और राष्ट्रीय राजधानी में उनके द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की सूची मांगी है.

प्रेस बयान में कहा गया है, ‘विडंबना यह है कि इनमें से कई कदम राष्ट्रीय प्रेस दिवस के दिन उठाए गए.’



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