व्यक्ति अंदर से जैसा होता है, अमीरी में वही रूप बाहर आता है | As a person is inside, the same form comes out in richness


हॉन्ग कॉन्ग20 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

“चार पैसे क्या आ गए, ये लोग बदल गए।” किसी से तकलीफ होने पर या किसी को तंज में ऐसा कहते आपने कई बार सुना होगा। लेकिन अलग-अलग जगहों के एक्सपर्ट्स की स्टडी बताती है कि पैसा इंसान को नहीं बदलता। बल्कि, अमीर होने पर इंसान का वही रूप सामने आता है, जैसा वह वास्तविकता में अंदर से होता है।

या यूं कह सकते हैं कि अचानक मिली दौलत से व्यक्तित्व के वे पहलू उभरकर बाहर आ जाते हैं, जो सामान्य स्थिति में दबे रहते हैं। हालांकि व्यक्ति का ये दबा स्वरूप अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी। जैसे गुस्सा, लालच, घमंड या झूठ-फरेब और हिंसा के भाव उसमें भरे हों।

डरने वालों को दौलत परेशान करती है
ऐसे लोग दौलत मिल जाने पर इन भावों को संभाल नहीं पाते। वे ज्यादा आत्मविश्वास से भर जाते हैं। नताशा नॉक्स 400 करोड़ रुपए से ज्यादा संपत्ति वालों की फाइनेंशियल प्लानिंग करती हैं। वे कहती हैं- आपमें डर है तो दौलत आने पर यह परेशान करने की हद तक बढ़ जाता है।

वहीं, कोलंबिया बिजनेस स्कूल में बिजनेस की एसोसिएट प्रोफेसर सांद्रा मैज कहती हैं, जब कभी कोई उपलब्धि हासिल होती है, तो व्यक्तित्व को एक तरह का झटका लगता है। वे इसे उदाहरण से समझाती हैं, एक ड्राइवर को अचानक करोड़ों रुपए मिल गए। वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए अचानक बेहद महत्वपूर्ण बन जाएगा। उसे लगेगा कि ये सब उसके व्यक्तित्व का आकर्षण है। उसका स्वभाव बदलने लगेगा।

अरबपतियों की ऊलजुलूल हरकतें उनका मूल स्वभाव
यही वजह है कि तमाम अरबपतियों की ऊलजुलूल हरकतें सामने आती हैं। दरअसल ये उनका मूल स्वभाव है। वॉक एंड टॉक थेरेपी की फाउंडर मनोविज्ञानी क्ले कॉकरेल कई अरबपतियों और उनके परिवार के लोगों का इलाज करती हैं।

वे कहती हैं- कुछ लोग दौलत के आते ही उसके खोने के डर में जीने लगते हैं। कई उद्योगपतियों ने लंबे समय तक इस दौलत के लिए मेहनत की और जब यह मिली तो वे समझ ही नहीं पा रहे थे कि क्या करें। वे बहुत ज्यादा डरे हुए थे। जरूरत से ज्यादा दौलत डराती है।

धीरे-धीरे अमीर होने वाला इंसान बैलेंस्ड रहता है
कॉकरेल कहती हैं, धीरे-धीरे कमाई दौलत का इंसान अभ्यस्त हो जाता है। वह पैसा और खुद को संभालना सीख जाता है, पर अचानक आई दौलत का दबाव इतना ज्यादा होता है कि कई बार इंसान डिप्रेशन में भी चला जाता है।वह समाज से कटने लगता है, अकेलापन उसे अच्छा लगता है।

खबरें और भी हैं…

Add a Comment

Your email address will not be published.