सीबीआई ने 750 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी में रोटोमैक ग्लोबल के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया


पेन बनाने वाली कंपनी रोटोमैक ग्लोबल पर बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले सात बैंकों के कंसोर्टियम का कुल 2,919 करोड़ रुपये का बकाया है. इस बकाये में इंडियन ओवरसीज बैंक का हिस्सा 23 प्रतिशत है.

(फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) से जुड़े 750.54 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में कानपुर की कंपनी रोटोमैक ग्लोबल और उसके निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

पेन बनाने वाली इस कंपनी पर बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले सात बैंकों के गठजोड़ (कंसोर्टियम) का कुल 2,919 करोड़ रुपये का बकाया है. इस बकाये में इंडियन ओवरसीज बैंक का हिस्सा 23 प्रतिशत है.

जांच एजेंसी ने कंपनी और उसके निदेशकों साधना कोठारी और राहुल कोठारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के अलावा आपराधिक साजिश (120बी) और धोखाधड़ी (420) से संबंधित आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.

इंडियन ओवरसीज बैंक की लखनऊ शाखा के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक संजय किशोर की शिकायत पर बीते 14 नवंबर को यह एफआईआर दर्ज की गई थी.

बैंकों के गठजोड़ के सदस्यों की शिकायतों के आधार पर कंपनी पहले से ही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की जांच के घेरे में है.

सीबीआई को अपनी शिकायत में इंडियन ओवरसीज बैंक ने आरोप लगाया कि कंपनी को 28 जून, 2012 को 500 करोड़ रुपये की गैर-कोष आधारित राशि सीमा स्वीकृत की गई थी.

वहीं, 750.54 करोड़ रुपये की बकाया राशि में चूक के बाद खाते को 30 जून, 2016 को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया था.

बैंक ने आरोप लगाया कि कंपनी की विदेशी व्यापार आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उसने 11 साख पत्र (Letters of Credit – एलसी) जारी किए थे, जिसमें 743.63 करोड़ रुपये की कुल राशि में शामिल थी, जिससे बैंक के लिए कोई सुरक्षा नहीं बची.

कंपनी ने अपने द्वारा किए गए व्यापार के लिए दस्तावेजों का पूरा ब्योरा पेश नहीं किया और सभी साख पत्र दो पक्षों को जारी किए गए फेयरेस्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स एंड लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड और आरबीए वेंचर लिमिटेड.

बैंक का आरोप है कि दस्तावेजों के अभाव में लैंडिंग बिल (परिवहन कंपनी द्वारा जारी किया गया एक कानूनी दस्तावेज जो माल के प्रकार, मात्रा और गंतव्य का विवरण देता है) में दावा किए गए व्यापारिक जहाज और यात्राओं की प्रामाणिकता पर संदेह है.

बैंक द्वारा किए गए फॉरेंसिक ऑडिट में बही-खाते में कथित हेरफेर और साख पत्र से उत्पन्न होने वाली देनदारियों का खुलासा न करने के संकेत मिले थे. ऑडिट में लेखा परीक्षा में बिक्री अनुबंधों, लदान के बिलों और संबंधित यात्राओं में भी अनियमितताएं पाई गई हैं.

इसमें कहा गया है कि कुल की 92 प्रतिशत यानी 26,143 करोड़ रुपये की बिक्री एक ही मालिक और समूह के चार पक्षों को की गई.

बैंक ने आरोप लगाया कि इन पक्षों या पार्टियों को प्रमुख आपूर्तिकर्ता रोटोमैक समूह था. वहीं इन पक्षों की ओर से खरीद करने वाला बंज ग्रुप था. रोटोमैक समूह को उत्पादों की बिक्री करने वाला प्रमुख विक्रेता बंज ग्रुप था. इन चारों विदेशी ग्राहकों का समूह के साथ संबंध था.

कंपनी ने कथित रूप से बैंक के साथ धोखाधड़ी की और धन को इधर-उधर किया. इससे बैंक को वित्तीय नुकसान हुआ और कंपनी ने खुद गलत तरीके से 750.54 करोड़ रुपये का लाभ कमाया. अभी इसकी वसूली नहीं हो सकी है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)



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