सुप्रीम कोर्ट ने नविका कुमार के ख़िलाफ़ दर्ज सभी एफ़आईआर दिल्ली पुलिस को सौंपी



यह मामला 26 मई को एक ‘टीवी डिबेट शो’ के दौरान पैगंबर के खिलाफ की गई टिप्पणी से संबंधित है. नविका ‘टाइम्स नाउ’ पर प्रसारित इस परिचर्चा की एंकर थीं, जिसमें नूपुर शर्मा ने यह टिप्पणी की थी.

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि आठ सप्ताह तक नविका कुमार के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी, ताकि वह अंतरिम अवधि में अपने बचाव के उपाय कर सकें.

उसने नविका कुमार को एफआईआर रद्द करने के अनुरोध को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की अनुमति दे दी.

न्यायालय ने यह भी कहा कि इस मामले में नविका कुमार के खिलाफ भविष्य में दर्ज होने वाली हर एफआईआर को दिल्ली पुलिस के पास भेजा जाएगा.

पीठ ने कहा, ‘याचिकाकर्ता को अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर खारिज करने की राहत का अनुरोध करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में जाने की स्वतंत्रता होगी. हमने इसके गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है.’

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई मामले की जांच करेगी.

अदालत ने कहा, ‘सभी एफआईआर दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ इकाई को हस्तांतरित की जानी हैं. दिल्ली पुलिस की एफआईआर मुख्य होगी.’

न्यायालय ने नविका कुमार को आठ अगस्त को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी थी. पीठ ने कुमार के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाहियों को खारिज करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र, पश्चिम बंगाल सरकार एवं अन्य को नोटिस जारी किए थे.

न्यायालय ने कहा था, ‘एक अंतरिम उपाय के तहत संबंधित सभी एफआईआर/शिकायतों या 26 मई को प्रसारित हुए कार्यक्रम के संबंध में भविष्य में दर्ज की जाने वाली एफआईआर/शिकायतों के संबंध में याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए.’

नूपुर शर्मा और नविका कुमार के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में एफआईआर दर्ज की गई थी. बीते जून महीने में शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी करने के तीन सप्ताह बाद समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ की नविका कुमार के नाम एफआईआर दर्ज हुई थी.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, नविका के खिलाफ महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और जम्मू कश्मीर में मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद उसने शीर्ष अदालत का रुख किया और मामलों को रद्द करने या उन्हें एक राज्य में स्थानांतरित करने की मांग की थी.

उन्होंने इस तथ्य का हवाला दिया था कि नूपुर शर्मा को शीर्ष अदालत से राहत मिली थी, जिसने उनके खिलाफ दर्ज इसी तरह की विभिन्न एफआईआर को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था.

इससे पहले अगस्त 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ देशभर में दर्ज सभी एफआईआर को एक साथ जोड़ने और उसे दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस द्वारा जांच पूरी होने तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से शर्मा को अंतरिम संरक्षण की अवधि भी बढ़ा दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने शर्मा को उनकी टिप्पणी के संबंध में दर्ज एफआईआर को रद्द करने के अनुरोध को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट जाने की अनुमति देते हुए कहा था कि भविष्य में दर्ज की जाने वाली सभी एफआईआर भी जांच के लिए दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित की जाएं.

मालूम हो कि पैगंबर मोहम्मद को लेकर टिप्पणी के लिए भाजपा ने बीते पांच जून को अपनी राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को निलंबित कर दिया और दिल्ली इकाई के प्रवक्ता नवीन जिंदल को निष्कासित कर दिया था.

इसके बाद दोनों भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी की मांग पर बीते 10 जून को देश भर के कई शहरों और कस्बों में विरोध प्रदर्शन हुए थे. इस दौरान झारखंड की राजधानी रांची में हिंसक प्रदर्शन के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी.

इतना ही नहीं नूपुर शर्मा की टिप्पणी पर विवाद मचने के बाद कुछ इस्लामी देशों ने भारतीय राजदूतों और उच्चायुक्तों को तलब किया था. कतर, ईरान और कुवैत समेत खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण देशों ने उनकी टिप्पणी का विरोध किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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