सोशल मीडिया कंपनियां किसी भी पार्टी को चुनाव जिता सकती हैं: राहुल गांधी



वाशिम: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि सोशल मीडिया के जरिये चुनावों में धांधली की जा सकती है और सोशल मीडिया कंपनियां चाहें तो किसी भी पार्टी को चुनाव जिता सकती हैं.

उन्होंने किसी पार्टी का नाम लिए बिना यह भी कहा कि एक विचारधारा और उसके नेताओं द्वारा समाज में वैमनस्य पैदा करने के लिए सांप्रदायिक हिंसा को रणनीतिक हथियार के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है.

गांधी ने महाराष्ट्र के वाशिम शहर में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के 70वें दिन सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और जीजी पारिख के नेतृत्व में नागरिक संस्थाओं के सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान ये टिप्पणियां कीं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि किसी को पता नहीं है कि सत्ता पक्ष किस पार्टी का है.

राहुल ने सोशल मीडिया कंपनियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके द्वारा ‘व्यवस्थित पूर्वाग्रह’ लागू किया जा रहा है, जिससे कोई भी पार्टी चुनाव जीत सकती है.

बुधवार दोपहर नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं के साथ उनकी बैठक के बाद कांग्रेस द्वारा जारी बयान के अनुसार राहुल गांधी ने कहा, ‘भले ही ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) सुरक्षित है, सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय चुनावों में धांधली हो सकती है. बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां चाहें तो किसी भी पार्टी को चुनाव जिता सकती हैं. वहां व्यवस्थित तरीके से पूर्वाग्रह लागू किया जा रहा है और मेरे सोशल मीडिया हैंडल इसका एक जीवंत उदाहरण हैं.’

कांग्रेस के एक बयान में कहा गया है कि बैठक के दौरान प्रतिनिधियों ने राजनीतिक लोकतंत्र और सांप्रदायिक सद्भाव जैसे प्रासंगिक मुद्दों को उठाया.

राजनीतिक लोकतंत्र के बारे में पाटकर ने कहा कि यह ईवीएम के बारे में संदेह तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका मतलब यह भी है कि वीवीपैट (वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) से मिलान बेहद जरूरी है.

पाटकर ने सभी दलों के घोषणा-पत्र की रूपरेखा तैयार किए जाने और निर्माण में नागरिकों की भागीदारी के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि घोषणा-पत्र को सभी राजनीतिक दलों के लिए बाध्यकारी बनाने के संबंध में कानूनी सुधार किए जाने चाहिए.

पाटकर ने ग्राम सभाओं और स्थानीय निकायों को मजबूत करने की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने इसकी परिकल्पना की थी. उन्होंने किसानों के लाभ के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और श्रम कानूनों जैसे कानूनों में सुधार पर भी जोर दिया था.

मानवाधिकार कार्यकर्ता इरफान इंजीनियर ने सांप्रदायिक वैमनस्य, ध्रुवीकरण के मुद्दों को उठाया. गांधी ने इसका जवाब देते हुए कहा, ‘एक विचारधारा और उसके नेताओं द्वारा समाज में वैमनस्य पैदा करने के लिए सांप्रदायिक हिंसा को रणनीतिक हथियार के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बाद में राहुल ने विदर्भ क्षेत्र स्थित वाशिम जिले के मेदशी में एक सभा को संबोधित किया.

उन्होंने कहा, ‘हमारी यात्रा बिना किसी घृणा या हिंसा के सभी को अपने साथ लेकर चलना चाहती है. हम किसी को पीछे नहीं छोड़ते, बल्कि गिरे हुओं को उठाते हैं. इसके विपरीत दिल्ली में सत्ता पर काबिज देशभक्त बैठे हैं और ऐसे ही महाराष्ट्र में भी कुछ देशभक्त हैं. (पीएम) नरेंद्र मोदी दिल्ली में हैं. मुझे नहीं पता कि महाराष्ट्र में (सत्ता) किस पार्टी की है या मुझे उन्हें किससे जोड़ना चाहिए.’

राहुल ने बुधवार को केंद्र सरकार व सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए दावा किया था कि उनकी नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है और किसानों की कमर तोड़ दी है.

उन्होंने कहा था कि बड़े औद्योगिक घराने नहीं, बल्कि छोटे व मध्यम उद्यम बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करते हैं, लेकिन वे केंद्र की 2016 की नोटबंदी की कवायद और 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन से तबाह हो गए.

महा विकास आघाडी (एमवीए) में कांग्रेस के सहयोगी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और शिवसेना के नेताओं ने भी महाराष्ट्र में पदयात्रा में हिस्सा लिया है.

राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार सुबह महाराष्ट्र के अकोला जिले से पार्टी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ फिर शुरू की. ‘भारत यात्री’ रात में विश्राम करने के लिए एक फैक्टरी में रुके थे.

तमिलनाडु के कन्याकुमारी से सात सितंबर को शुरू हुई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ बृहस्पतिवार को 71वें दिन में प्रवेश कर गई. वहीं, महाराष्ट्र में यह यात्रा का 11वां दिन है. महाराष्ट्र के अकोला और बुलढाणा जिले से गुजरने के बाद 20 नवंबर को यात्रा मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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