24 की उम्र तक महिलाओं में जोखिम दोगुना | Suppressing thoughts increases the risk of panic attack


2 घंटे पहले

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तनाव और अकेलापन पैनिक अटैक का सबसे बड़ा कारण है। मन का भय या दिल की बात शेयर न कर पाने से यह मनोरोग बन जाता है। इसके मामले तेजी से बढ़े हैं। 24 की उम्र तक पैनिक अटैक की आशंका सर्वाधिक और महिलाओं में दोगुनी होती है।

पैनिक अटैक से संबंधित आर्टिकल दैनिक भास्कर के 17 नवंबर के अंक में प्रकाशित किया गया था। जिस पर पाठकों ने बड़ी संख्या में सवाल पूछे हैं। उनके जवाब दे रहे हैं दिल्ली माइंड क्लिनिक के कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट और को-डायरेक्टर डॉ. परमजीत सिंह।

सवाल: पैनिक अटैक क्यों आता है?
जवाब:
पैनिक अटैक शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कारणों के मिले जुले असर से उत्पन्न होता है। शारीरिक कारण जैसे थॉयराइड अथवा अन्य ग्लैंड में रसायनों की कमी, शरीर में रक्त अथवा हीमोग्लोबिन की कमी, मस्तिष्क में सेरोटोनिन नामक हार्मोन की कमी, मानसिक तनाव, चिंताजनक स्थिति, व्यक्तित्व में चिंता का स्वभाव इत्यादि प्रमुख हैं। वहीं कुछ नशे जैसे शराब, गांजा आदि भी पैनिक अटैक जैसी स्थिति पैदा करते हैं । ये कारण मस्तिष्क पर स्ट्रेस डालते हैं और अमेग्डाला नामक मस्तिष्क के हिस्से में रसायनों के बदलाव से पैनिक अटैक होता है।

सवाल: पैनिक अटैक का खतरा युवाओं को अधिक क्यों होता है?
जवाब: पैनिक अटैक शुरू होने की औसत उम्र 24 साल है। यह युवा लोगों मे अधिक देखा जाता है। इसका कारण युवाओं मे विषम परिस्थिति और तनाव का सही सामना ना कर पाना भी हो सकता है। नशा और खराब लाइफ स्टाइल भी इसका खतरा बढ़ा देते हैं।

सवाल: मानसिक अस्थिरता बहुत ज्यादा है। अनावश्यक विचारों की एक श्रंखला चलती रहती है। वर्तमान में नहीं रह पाता। यह क्या है?
जवाब:
ये लक्षण न्यूरोसिस ग्रुप की बीमारियों का संकेत हैं। डिप्रेशन, स्ट्रेस, एंग्जाइटी, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर वो बीमारियां हैं जिनमें ऐसे लक्षण दिखते हैं। ये अधिक तनाव की स्थिति में भी दिख सकते हैं।

सवाल: कोई विचार लंबे समय तक दबा कर रखने से भी पैनिक अटैक का खतरा बढ़ता है क्या?
जवाब: जी हां, कोई विचार मन में बहुत समय तक दबा कर रखने से भी पैनिक अटैक का खतरा बढ़ता है। इससे बचने के लिए सामाजिक दायरा बढ़ाएं, परिवार और मित्रों से जुड़े रहें। अपनी बात मन में ना रखें। परिजनों से साझा करें। अकेलेपन से बचें इसके लिए डायरी भी लिखी जा सकती है कोई हॉबी या शौक मंे भी समय देने का प्रयास करें। शारीरिक फिटनेस का भी ध्यान रखें ।

सवाल: सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, दम घुटने का एहसास, अचानक पसीना आना क्या पैनिक अटैक हो सकता है?
जवाब: जी ये सभी लक्षण पैनिक अटैक मे दिखाई पड़ते हैं। इसके अलावा अचानक घबराहट होना और हिम्मत छोड़ देना भी इसमे देखा जाता है। ऐसा होने पर डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

सवाल: क्या पैनिक अटैक जानलेवा हो सकता है?
जवाब:
जी नहीं , पैनिक अटैक जानलेवा नहीं हो सकता। ऐसा होने पर हिम्मत रखें और तुरंत इलाज कराएं ।

सवाल: क्या पैनिक अटैक के दौरे भी पड़ते हैं ?
जवाब:
आम भाषा में लोग पैनिक अटैक को घबराहट का दौरा भी कह देते हैं, परंतु ये मिर्गी के दौरे ना होकर के टेंशन के दौरे होते हैं ।

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