Agra University: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में आवेदन डंप कर होता है वसूली का खेल





डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में क्लास-कैटेगिरी देखकर आवेदन डंप किये जाते हैं फिर दलाली का खेल शुरू किया जाता है। विदेश में नौकरी के लिए ट्रांसस्क्रिप्ट की जरूरत हो या बीएड का सत्यापन हो और मेडिकल की डिग्री। विवि में लगातार ऐसे आवेदनों को लंबित किया जाता है। कई बार आवेदनों में कमियां निकालकर महीनों तक डंपिंग बॉक्स में डाल दिया जाता है। इसके बाद शुरू होता है दलाली का खेल। परेशान छात्र या तो खुद दलालों के फेर में फंस जाते हैं, या फिर दलाल उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं। इस सबके बीच पहले से विवि को फीस दे चुके छात्रों की जेब पर डाका डल जाता है।

सबसे खास बात यह है कि विश्वविद्यालय में छात्रों के आवेदन यूं ही डंप नहीं किए जाते हैं। बल्कि आवेदनों को छांट-छांटकर अलग किया जाता है। यह विवि में चक्कर काटने वाले छात्रों की समस्याओं को देखकर समझा जा सकता है। सत्यापन, संशोधन, ट्रांसस्क्रिप्ट, मेडिकल डिग्री सहित कई प्रकार के आवेदन पर बिना छात्र के विवि आए काम नहीं होता है।

छात्राएं लगा चुकी हैं शोषण का आरोप

विवि में समस्या समाधान के नाम पर छात्राओं को परेशान करने के कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। विवि के कई विभागों में कर्मचारियों पर छात्राओं ने फोन पर परेशान करने और विवि में आकर मिलने तक के आरोप लगाए हैं। विवि प्रशासन की ओर से कर्मचारियों को बचाने के रुख के बाद मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है।

ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन सिस्टम को सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। छात्र समस्याओं के समाधान की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। यदि जानबूझकर छात्रों के आवेदनों को लंबित किया जा रहा है, तो ऐसे प्रकरण में जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. विनोद कुमार सिंह, कुलसचिव

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