festival of this week and saptah ke vrat or tyohar 21 to 27 November 2022


वर्तमान सप्ताह का शुभारंभ मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि और सौभाग्य योग के साथ हो रहा है। इस सप्ताह कई प्रमुख व्रत त्योहार पड़ने वाले हैं। यह सप्ताह शिव भक्तों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि सप्ताह के पहले दिन सोम प्रदोष का व्रत किया जाएगा और दूसरे दिन मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। इसके बाद 23 नवंबर को शुक्र उदय हो रहे हैं, जिससे मांगलिक कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएंगे। वहीं सप्ताह के अंत में भगवान गणेश का प्रिय व्रत वैनायकी गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। जानिए सप्ताह के प्रमुख त्योहार व व्रत के बारे में…

सोम प्रदोष व्रत (21 नवंबर, सोमवार)

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हिंदू पंचांग के आधार पर हर माह में दो बार प्रदोष व्रत आता है, लेकिन यदि सोमवार को प्रदोष व्रत पड़ जाता है तो वह बहुत फलदाई माना जाता है। यदि किसी भी महिला को प्रदोष व्रत रखना है, तो सोमवार के दिन से ही प्रारंभ कर सकती हैं। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि पूर्वक पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। सोमवार को अगर प्रदोष व्रत पड़ता है तो उसे सोम प्रदोष व्रत और मंगलवार को यह तिथि आती है तो भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। यह व्रत भगवान शिव की कृपा और संतान प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

मासिक शिवरात्रि व्रत (22 नवंबर, मंगलवार)

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हर माह की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह तिथि इस बार 22 नवंबर दिन मंगलवार को है। मासिक शिवरात्रि का व्रत परिवार की सुख-शांति के साथ कल्याण और जीवन के कष्टों से मुक्ति के लिए रखा जाता है। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं में मासिक शिवरात्रि का व्रत करना सबसे उत्तम माना गया है। इस व्रत के करने से मोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत जीवन पर्यंत करें अन्यथा चौदह साल बाद उघापन कर दें।

मांगलिक कार्य प्रारंभ (23 नवंबर, बुधवार)

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हिंदू पंचांग के आधार पर तुलसी विवाह के बाद ही विवाह आदि शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। लेकिन, इस बार शुक्र अस्त हो गया था, इस वजह से विवाह आदि शुभ कार्य नहीं प्रारंभ हुआ। अब शुक्र उदय हो चुका है। आज उनके बालत्व की समाप्ति भी हो जाएगी। इसलिए 23 तारीख के बाद विवाद शुभ कार्य भी प्रारंभ हो जाएंगे।

वैनायकी गणेश चतुर्थी व्रत (27 नवंबर, रविवार)

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हिंदू पंचांग के आधार पर गणेश चतुर्थी व्रत महीने में दो बार आता है, लेकिन शुक्ल पक्ष के व्रत में यदि रविवार के दिन गणेश चतुर्थी व्रत हो जाता है तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है। जैसे सूर्य के प्रकाश से सारे अंधकार दूर हो जाते हैं, उसी प्रकार से रविवती वैनायकी गणेश चतुर्थी व्रत करने से या गणेश चतुर्थी के दिन गणपति का दर्शन करने से हर प्रकार की सुख-सुविधाओं को भी व्यक्ति प्राप्त कर लेता है।



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