Know who is Swarbhanu and what is the relation with Rahu Ketu


सप्ताह का ज्ञान
जन्म कुंडली का तृतीय भाव पराक्रम भाव कहलाता है। इस भाव से व्यक्ति का प्रभाव, रुतबा, क्षमता, बल और धैर्य का आकलन होता है। इसी भाव से छोटे भाई-बहनों का विचार किया जाता है। श्रवण यानि सुनने की क्षमता, हाथ, कंधे, फेफड़े और गले की स्थिति का संकेत यही भाव देता है। जीवन में समर्थकों, अनुयायियों और सेवकों का बोध इसी से होता है।

प्रश्न:
स्वरभानु का राहु-केतु से क्या संबंध है? -निशा अवस्थी
उत्तर: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक शक्तिशाली असुर था, स्वरभानु। जहां उसकी मानसिक और बौद्धिक कौशल व क्षमता कमाल थी, तो दैहिक बल बेमिसाल। उच्च स्तर का साधक था वह। साधक माने स्कॉलर। शिव का उपासक भी था, और उस पर शंकर का वरदहस्त भी था। अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित और दृढ़ प्रतिज्ञ था। फलस्वरूप स्वरभानु ने कई अद्वितीय और विलक्षण आंतरिक क्षमताएं हासिल कर ली थीं। उसे उम्दा दर्जे का सेनापति भी माना जाता था। देवों में भी उसकी अच्छी पैठ थी, बढ़िया मित्रता थी, असुर उसकी प्रतिभा का लोहा मानते थे। उसके बाहुबल के तो देव सेनापति मंगल भी कायल थे, पर उसके चातुर्य से उन्हें ईर्ष्या थी। क्योंकि, बल और चातुर्य के समागम के कारण मंगल उसके आगे कहीं ठहरते नहीं थे। समुद्र मंथन के दौरान अमृतपान से वह अमर तो हो गया, पर सुदर्शन चक्र ने उसका सर धड़ से अलग कर दिया। कटा शीश राहु कहलाया और सर विहीन धड़ केतु।

प्रश्न: विपल क्या होता है? -प्रतीक गोयनका
उत्तर: यह काल गणना की एक इकाई है। एक पल के साठवें हिस्से को विपल कहते हैं, यानी 60 विपल का एक पल होता है। 60 पलों की एक घड़ी होती है। एक घड़ी लगभग 24 मिनटों के बराबर होती है। ढाई घड़ी से एक होरा, अर्थात् एक घंटा बनता है। 3 होरा से एक प्रहर और 8 प्रहर या 24 होरा से एक दिवस का निर्माण होता है।

प्रश्न:
कुंडली में त्रिकोण का स्वामी अगर पाप ग्रह हो, तो कैसे परिणाम मिलते हैं? – -विकास सोनकर
उत्तर: सद्‌गुरुश्री कहते हैं कि कुंडली में लग्न, पंचम व दशम भाव त्रिकोण कहलाता है। त्रिकोण के स्वामी शुभ ग्रह हों या पाप ग्रह, सदैव अच्छा और शुभ परिणाम देते हैं।

अगर, आप भी सद्गुरु स्वामी आनंदजी से अपने सवालों के जवाब जानना चाहते हैं या किसी समस्या का समाधान चाहते हैं तो अपनी जन्मतिथ‍ि, जन्म समय और जन्म स्थान के साथ अपना सवाल saddgurushri@gmail.com पर मेल कर सकते हैं। सद्‌गुरुश्री (डा. स्वामी आनंदजी)

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